रिपोर्ट: लाइव भारत / अमृतसर 07-जून (मनी शर्मा)
अमृतसर, 7 जुलाई। जनहित में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए *कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर* ने नागरिकों के 255 गुम हुए मोबाइल फोन सफलतापूर्वक ट्रेस कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंप दिए हैं। ये मोबाइल फोन जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब के विभिन्न जिलों से बरामद किए गए हैं। बरामद किए गए सभी मोबाइल फोन की अनुमानित कुल कीमत *करीब 41.40 लाख रुपये बताई गई है। यह गुम हुए मोबाइल फोन वापस करने का कमिश्नरेट पुलिस का *चौथा बड़ा अभियान* है। इससे पहले पहले चरण में *100, दूसरे चरण में **200* और तीसरे चरण में *400* मोबाइल फोन उनके मालिकों को लौटाए जा चुके हैं। अब चौथे चरण में *255 मोबाइल फोन* सफलतापूर्वक ट्रेस कर लोगों को सौंपे गए हैं।
पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) आईपीएस गुरप्रीत सिंह भुल्लर* के निर्देशों पर कमिश्नरेट पुलिस की टीमों ने आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी का उपयोग करते हुए इन मोबाइल फोनों का पता लगाया। इनमें से *220 मोबाइल फोन साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन* की टीम ने ट्रेस किए, जबकि *35 मोबाइल फोन सब-डिवीजन सेंट्रल* की टीम द्वारा बरामद किए गए। बरामद मोबाइल फोनों में *आईफोन* के अलावा *पोको, वनप्लस, सैमसंग, वीवो, ओप्पो, रेडमी, रियलमी और शाओमी* जैसी कंपनियों के एंड्रॉयड स्मार्टफोन शामिल हैं।
जांच के दौरान *केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR)* प्रणाली और तकनीकी निगरानी की मदद से मोबाइल फोन *श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर), राजस्थान, बेंगलुरु (कर्नाटक), रायबरेली और आगरा (उत्तर प्रदेश), मध्य प्रदेश, लुधियाना (पंजाब)* सहित कई अन्य स्थानों से ट्रेस किए गए। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंप दिए गए।
इस अवसर पर कमिश्नरेट पुलिस ने लोगों से अपील की कि यदि उनका मोबाइल फोन गुम हो जाए तो वे बिना देरी किए अपने *नजदीकी पुलिस स्टेशन* या *सांझ केंद्र* में इसकी शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही *दूरसंचार मंत्रालय* के *CEIR (Central Equipment Identity Register)* पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करें, जिससे मोबाइल फोन को तुरंत ब्लॉक किया जा सके, उसका पता लगाया जा सके और उसके दुरुपयोग को रोका जा सके। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे, ताकि गुम हुए मोबाइल फोन जल्द से जल्द उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाए जा सकें।




