लाइव भारत अमृतसर (मनी शर्मा)
अमृतसर | 20 अक्टूबर 2026
अमृतसर में दशहरे को लेकर लोगों के बीच खासा उत्साह देखने को मिलता है। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरा पर्व पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। ऐसे में शहर के लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है कि आखिर आज अमृतसर में रावण दहन कहां-कहां होगा? किन जगहों पर बड़े-बड़े पुतले देखने को मिलेंगे और कौन से स्थान लोगों के आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं?
आज की इस रिपोर्ट में हम आपको अमृतसर और आसपास के कुछ प्रमुख स्थानों के बारे में जानकारी देंगे, जहां दशहरा और रामलीला से जुड़े आयोजनों की जानकारी सामने आई है।
पहला स्थान — दुर्गियाना मंदिर परिसर
अमृतसर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल दुर्गियाना मंदिर परिसर में दशहरा आयोजन को लेकर खास चर्चा है। यहां 100 फुट ऊंचे रावण के पुतले की जानकारी सामने आई है। इतना ऊंचा पुतला लोगों के आकर्षण का केंद्र बन सकता है। दशहरे के अवसर पर परिवारों के साथ लोग इस तरह के आयोजनों में पहुंचते हैं और भगवान श्रीराम की विजय की परंपरा से जुड़ते हैं।
दूसरा स्थान — नारायणगढ़ का पंचरत्न श्री कृष्ण मंदिर
अमृतसर के नारायणगढ़ स्थित पंचरत्न श्री कृष्ण मंदिर से जुड़े आयोजन की जानकारी भी सामने आई है। यहां 75 फुट के रावण, 70 फुट के मेघनाद और 65 फुट के कुंभकर्ण के पुतले बनाए जाने की जानकारी मिली है। इन विशाल पुतलों को लेकर लोगों में उत्सुकता हो सकती है। हालांकि, यहां आज रावण दहन होने की तारीख और समय की पुष्टि आयोजन समिति से करना जरूरी है।
तीसरा स्थान — अजनाला का शिव मंदिर रामलीला ग्राउंड
अमृतसर जिले के अजनाला में शिव मंदिर रामलीला ग्राउंड में भी रामलीला और दशहरा महोत्सव से जुड़े आयोजन की जानकारी मिली है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, रावण के अहंकार और अंत में अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया जाता है। यहां पहुंचने से पहले स्थानीय आयोजकों से कार्यक्रम की जानकारी जरूर प्राप्त करें।
चौथा स्थान — कोट खालसा
अमृतसर के कोट खालसा इलाके में माता भद्रकाली से संबंधित दशहरा कार्यक्रम की जानकारी भी सामने आई है। धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। लेकिन यहां रावण दहन आज होगा या नहीं, इसकी पुष्टि अभी जरूरी है।
दशहरे का क्या है संदेश?
दशहरा केवल रावण के पुतले को जलाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लालच और बुराई को समाप्त करने का संदेश भी देता है। भगवान श्रीराम की विजय हमें सिखाती है कि सत्य और धर्म का मार्ग कितना भी कठिन क्यों न हो, अंत में जीत सत्य की ही होती है।
तो ये थे अमृतसर और आसपास के कुछ प्रमुख स्थान, जहां दशहरा और रामलीला से जुड़े आयोजनों की जानकारी सामने आई है। अगर आप भी परिवार के साथ रावण दहन देखने जाने की योजना बना रहे हैं, तो निकलने से पहले आयोजन का समय, स्थान और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था जरूर जांच लें।
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