सच्चा गुरु लाधो रे’ दिवस की पवित्र भावना से पंजाब और दिल्ली की राजनीतिक पार्टियों ने किया बड़ा विश्वासघात: हवारा कमेटी

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लाइव भारत 29-08-2026 (मनी शर्मा)

जगतार सिंह हवारा कमेटी ने आरोप लगाया है कि पंजाब और दिल्ली की राजनीतिक पार्टियों ने ‘सच्चा गुरु लाधो रे’ दिवस की पवित्र भावना को गहरी ठेस पहुंचाई है।

प्रेस को जारी बयान में प्रो. बलजिंदर सिंह, महाबीर सिंह सुल्तानविंड, बापू गुरचरण सिंह और डॉ. सुखदेव सिंह बाबा ने कहा कि सिख इतिहास के अनुसार 22 नकली बाबाओं ने मंजियां स्थापित कर स्वयं को असली गुरु साबित करने का प्रयास किया था। इसके विपरीत भाई माखन शाह लुबाणा जी ने सच्चे गुरु की पहचान कर ‘सच्चा गुरु लाधो रे’ का महान इतिहास रचा।

कमेटी नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली की मनुवादी सोच के अधीन अकाली दलों और 1984 की घटनाओं के लिए जिम्मेदार कांग्रेस के बीच आपसी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति ने पंजाब के लोगों को वास्तविक मुद्दों से भटका दिया है।

कमेटी ने कहा कि ‘गुरु लाधो रे’ दिवस यह संदेश देता है कि सिखों को आध्यात्मिक और राजनीतिक दिशा देने वाला सच्चा मार्गदर्शक गुरु है, न कि झूठ की नींव पर खड़ी और समाज का शोषण करने वाली राजनीतिक ताकतें।

प्रो. बलजिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि सभी राजनीतिक पार्टियां सिखों को कमजोर करने के लिए डेरा संस्कृति को उसी तरह बढ़ावा दे रही हैं, जैसे इतिहास में 22 नकली मंजियों के माध्यम से किया गया था।

कमेटी ने कहा कि यह पंजाब की त्रासदी है कि आज जब पंथ को ‘गुरु लाधो रे’ के महान सिद्धांत को अपने हृदय में धारण कर पंथ और पंजाब की चढ़दी कला के लिए प्रयास करने चाहिए थे, उस समय प्रदेश की तथाकथित पंथक और राजनीतिक ताकतें दिल्ली के दरबार की ओर देख रही हैं और अपने निजी हितों के लिए कथित तौर पर ब्राह्मणवादी ताकतों में अपना सहारा तलाश रही हैं।

बयान में स्पष्ट किया गया कि पंजाब को किसी बाहरी शक्ति या राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी की छतरी की आवश्यकता नहीं है। कमेटी के अनुसार, जिन ताकतों पर सिखों की कथित नस्लकुशी, निर्दोष युवाओं पर अत्याचार, मानवता के हनन और पंजाब के प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदारी के आरोप लगते रहे हैं, उनसे पंजाब और सिखों के कल्याण की उम्मीद करना भविष्य के साथ गंभीर विश्वासघात होगा।

हवारा कमेटी ने कहा कि हिंदुत्ववादी अहंकार और ब्राह्मणवादी सोच गुरमत के समानता, अधिकार और सत्य के सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है। ऐसे में पंथक पहचान की आड़ में पंजाब की धरती पर इन गुरमत-विरोधी ताकतों के लिए नई राजनीतिक जमीन तैयार करना कौम के शहीदों के बलिदान के साथ सीधा विश्वासघात है।

कमेटी ने सवाल उठाया कि यदि ‘सच्चा गुरु लाधो रे’ दिवस का संदेश यह है कि सच्चा गुरु मिल चुका है, तो फिर पंथ और पंजाब को अपना रास्ता किसी हिंदुत्ववादी या दिल्ली-समर्थक राजनीतिक ताकत से पूछने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? क्या दिल्ली से आई राजनीतिक पार्टियों द्वारा पंजाब और पंथ के साथ किए गए कथित विश्वासघात दिखाई नहीं दे रहे?

हवारा कमेटी ने समूचे खालसा पंथ और पंजाबियों को बाहरी ताकतों की ओर देखने की प्रवृत्ति छोड़ने का आह्वान किया। कमेटी ने कहा कि सिखों का रास्ता, मंजिल और प्रभुसत्ता के सिद्धांत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की इलाही बाणी और गौरवशाली सिख इतिहास में पहले से निर्धारित हैं।

कमेटी ने कहा कि पंजाब को अपने भीतर वह साहस और खालसाई जज़्बा फिर से जगाना होगा, जो शब्द-गुरु के सामने सिर झुकाता है, लेकिन किसी जुल्मी ताकत या दिल्ली के शासकों के सामने कभी झुकता नहीं।

हवारा कमेटी ने कहा कि कौम को यह भ्रम हमेशा के लिए दूर कर देना चाहिए कि हमारा भला हमारे कथित कातिलों के हाथों में है। मुक्ति का मार्ग बाहर तलाशने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि गुरु मिल चुका है और रास्ता भी दिखाया जा चुका है। कमेटी के अनुसार, ‘गुरु लाधो रे’ दिवस का वास्तविक पंथक संदेश भी यही है।