लाइव भारत / मनी शर्मा अमृतसर- 22-अप्रैल -2026
61 लाख मीट्रिक टन आवक, 57 लाख मीट्रिक टन की खरीद पूरी
किसानों को 24 घंटे में भुगतान का दावा, 7109 करोड़ जारी
“किसानों को कोई दिक्कत नहीं आने देंगे”, सरकार का भरोसा
अमृतसर की भगतांवाला दाल मंडी में आज पंजाब के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने दौरा कर गेहूं खरीद व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने आढ़तियों और किसानों से मुलाकात कर मंडी के हालात की जानकारी हासिल की और व्यवस्थाओं पर संतोष जताया।
मीडिया से बातचीत में मंत्री ने कहा कि पंजाब में 1 अप्रैल से शुरू हुआ गेहूं खरीद सीजन अब अपने चरम पर है और इस बार प्रबंध पहले के मुकाबले काफी बेहतर हैं। उन्होंने बताया कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पिछले चार वर्षों में खरीद प्रणाली में बड़े सुधार किए गए हैं, जिनका असर अब साफ दिखाई दे रहा है।
मंत्री के अनुसार, इस बार मौसम के कुछ असर के बावजूद केंद्र सरकार के पूल के लिए निर्धारित 122 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। अब तक पंजाब की मंडियों में करीब 61 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जिसमें से लगभग 57 लाख मीट्रिक टन की खरीद की जा चुकी है। इसके साथ ही करीब 7109 करोड़ रुपये की राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि पहले किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों में कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब हालात काफी बदल चुके हैं। कई मामलों में किसानों की फसल कुछ ही घंटों में खरीद ली जा रही है और 24 घंटे के भीतर भुगतान भी कर दिया जा रहा है। इससे किसानों में संतोष का माहौल है और वे मंडियों से खुश होकर लौट रहे हैं।
मंत्री कटारूचक्क ने यह भी बताया कि सरकार ने लिफ्टिंग और स्टोरेज को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए हैं। ओपन प्लिंथ और गोदामों में अनाज को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, जबकि रेल मार्ग से अनाज की ढुलाई भी लगातार जारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलती रहें।
अंत में मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को मंडियों में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और उनकी फसल की खरीद व भुगतान समय पर हो। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि मंडियों में रोजाना आवक और खरीद के आंकड़े स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।




