महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर पाकिस्तान गए श्रद्धालु अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत लौटे, ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन कर हुए भावुक

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रिपोर्ट: लाइव भारत / अमृतसर 30-जून (मनी शर्मा)

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर पाकिस्तान गए श्रद्धालु अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत लौटे

अमृतसर महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा पर गए सिख श्रद्धालुओं का जत्था सोमवार को *अटारी-वाघा सीमा* के रास्ते भारत लौट आया। स्वदेश वापसी के दौरान श्रद्धालुओं के चेहरों पर आध्यात्मिक संतोष और खुशी साफ दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने के अपने अनुभव साझा किए और वहां मिले सम्मान, सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं की सराहना की।अमृतसर निवासी श्रद्धालु *बलवीर सिंह* ने बताया कि यात्रा के दौरान उन्होंने सबसे पहले *श्री ननकाना साहिब, जो गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान है, के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने **गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब, **श्री दरबार साहिब करतारपुर* तथा लाहौर स्थित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेका। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास से जुड़े पवित्र स्थलों के दर्शन कर उन्हें अद्भुत आध्यात्मिक शांति और आत्मिक संतुष्टि का अनुभव हुआ।बलवीर सिंह ने बताया कि पाकिस्तान सरकार की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए बेहतर प्रबंध किए गए थे। पूरे दौरे के दौरान सुरक्षा कर्मी उनके साथ मौजूद रहे और किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का अनुभव जीवनभर यादगार रहेगा और यदि भारत एवं पाकिस्तान के संबंध बेहतर हों तो दोनों देशों के लोगों के बीच प्रेम, भाईचारा और आपसी विश्वास और मजबूत हो सकता है।श्रद्धालु *हरजीत कौर* ने बताया कि जत्था *21 जून* को पाकिस्तान के लिए रवाना हुआ था और *30 जून* को भारत वापस लौटा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया गया और यात्रा के दौरान सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। ननकाना साहिब, पंजा साहिब, करतारपुर साहिब सहित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन कर उनकी लंबे समय से चली आ रही मनोकामना पूरी हुई। श्रद्धालुओं ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों से अपील की कि धार्मिक यात्राओं के लिए *वीजा प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए*, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन का अवसर मिल सके। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा देने से साझा विरासत, सांस्कृतिक संबंध और आपसी भाईचारा और अधिक मजबूत होगा।