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AI तस्वीर से श्री हरिमंदिर साहिब की कथित बेअदबी, सिख संगठनों में भारी रोष

लाइव भारत / अमृतसर 04-मई (मनी शर्मा)

नंगे सिर और चप्पल पहनकर दरबार साहिब के सामने खड़े दिखाए गए युवक, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने बढ़ाया विवाद

पंजाब के अमृतसर स्थित पवित्र धार्मिक स्थल श्री हरिमंदिर साहिब से जुड़ा एक और कथित बेअदबी का मामला सामने आया है, जिसने सिख समुदाय में गहरा रोष पैदा कर दिया है। इस बार विवाद की वजह एक वीडियो है, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया बताया जा रहा है।

वायरल वीडियो में कुछ युवकों को दरबार साहिब के सामने नंगे सिर और पैरों में चप्पल पहनकर खड़े दिखाया गया है, जो सिख धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ माना जाता है। वीडियो में एक युवक के हाथ में नई एक्टिवा स्कूटर की चाबी भी दिखाई दे रही है और वे फोटो खिंचवाते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, इस वीडियो को सोशल मीडिया पर स्टेटस के रूप में भी साझा किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया।

सिख धर्म में श्री हरिमंदिर साहिब की अत्यंत पवित्रता मानी जाती है। यहां प्रवेश करने से पहले सिर ढकना और जूते-चप्पल उतारना अनिवार्य होता है। ऐसे में इस तरह की वीडियो, चाहे वास्तविक हो या AI से बनाई गई हो, धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली मानी जा रही है।

मामले के सामने आने के बाद विभिन्न सिख जत्थेबंदियों और धार्मिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठनों का कहना है कि डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग कर धार्मिक स्थलों की गरिमा को ठेस पहुंचाना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह पहली बार नहीं है जब AI तकनीक के जरिए इस तरह की विवादित सामग्री सामने आई हो। इससे पहले भी कई बार श्री हरिमंदिर साहिब के अंदर की फर्जी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन दिखाया गया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक जहां एक ओर रचनात्मकता को बढ़ावा देती है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल समाज में भ्रम और तनाव पैदा कर सकता है। धार्मिक स्थलों से जुड़े फर्जी वीडियो या तस्वीरें लोगों की भावनाओं को भड़काने का कारण बन सकती हैं।

इस घटना के बाद प्रशासन और पुलिस पर भी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। सिख संगठनों ने मांग की है कि वीडियो बनाने और उसे वायरल करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से भी ऐसी सामग्री तुरंत हटाने की मांग की गई है।

आम लोगों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की हरकतें समाज में अशांति फैलाने का काम करती हैं और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस और साइबर टीमें मामले की जांच में जुटी हुई हैं। यह स्पष्ट किया जा रहा है कि वीडियो पूरी तरह से AI से बनाई गई है या उसमें असली फुटेज का भी इस्तेमाल हुआ है। जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि डिजिटल युग में धार्मिक स्थलों की गरिमा को बनाए रखने के लिए कड़े नियमों और निगरानी की आवश्यकता है।

 

 

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