गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में ‘एआई से सतत विकास के मार्ग’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
नई तकनीक का उपयोग मानवीय कल्याण और नैतिक मूल्यों से जुड़कर होना चाहिए – कुलपति प्रो. करमजीत सिंह
अमृतसर, 23 फरवरी 2026 (मनी शर्मा)
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में ‘एआई की मदद से सतत विकास के मार्ग’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि नई तकनीक का उपयोग मानव कल्याण और नैतिक मूल्यों के साथ जुड़कर किया जाना चाहिए।
उन्होंने “सरबत दा भला” के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का लाभ समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने “एआई लंगर” की अवधारणा समझाते हुए कहा कि जैसे लंगर में सभी को समान रूप से भोजन मिलता है, उसी प्रकार ज्ञान और तकनीक भी सबके लिए सुलभ होनी चाहिए। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए नई कौशलों के प्रशिक्षण हेतु सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
इस सम्मेलन का आयोजन पंजाब स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल तथा यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ फाइनेंशियल स्टडीज द्वारा गोल्डन जुबली सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन के सहयोग से किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. महेश वर्मा, कुलपति गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय ने कहा कि तकनीक का विकास समावेशी होना चाहिए और इसमें सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने जिम्मेदार तरीके से एआई के उपयोग, संसाधनों के विवेकपूर्ण प्रयोग और मानवता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्य वक्ता प्रो. गगनदीप शर्मा ने कहा कि सुशासन, प्रभावी विकास, उद्यमिता और स्थायित्व—ये सभी एआई के सही उपयोग से संभव हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए संतुलित ऊर्जा प्रणाली अपनाने की आवश्यकता बताई।
विदेश से आए विशिष्ट अतिथि प्रो. फेलिक्स पुइमे गुएन, University of A Coruña (स्पेन) ने वैश्विक स्तर पर तकनीक और सतत विकास के संबंधों पर विचार साझा किए। डेलॉइट से जुड़े अमित गुप्ता ने भी कहा कि एआई का उपयोग सहयोग और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
सम्मेलन के प्री-कॉन्फ्रेंस सत्र का संचालन प्रो. थपन कुमार सरकार, University of Southern Queensland द्वारा किया गया। एक विशेष चर्चा सत्र में अकादमिक जगत और उद्योग के विशेषज्ञों ने इस बात पर मंथन किया कि शोध कार्यों को जमीनी स्तर से कैसे जोड़ा जाए।
सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में देश-विदेश से आए शोधकर्ताओं ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। आयोजन के सफल संचालन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने संतोष व्यक्त किया




