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सरहाली के ऐतिहासिक गुरु गोबिंद सिंह खालसा स्कूल में स्थापित हुआ ‘जिम दा लंगर’ मुहिम का चौथा जिम

लाइव भारत अमृतसर (मनी शर्मा)

दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और डॉ. अवतार सिंह ने किया उद्घाटन, माझा क्षेत्र में 50 से अधिक जिम स्थापित करने का लक्ष्य

नशे से दूर रहकर युवाओं को खेलों और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ना है अभियान का उद्देश्य

सरहाली कलां (तरनतारन), 4 नवंबर 2026 (मनी शर्मा): पंजाब के युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें खेलों, कसरत तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘उड़ान ट्रस्ट’ की ओर से चलाई जा रही ‘जिम दा लंगर’ मुहिम के तहत चौथा जिम सरहाली कलां के ऐतिहासिक गुरु गोबिंद सिंह खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में स्थापित किया गया। इस जिम का उद्घाटन दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और उड़ान ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. अवतार सिंह ने किया।

इस अवसर पर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. करमजीत सिंह, उड़ान ट्रस्ट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. राकेश जोशी, शिरोमणि नाटककार केवल धालीवाल, स्कूल के प्रिंसिपल अजय सिंह हुंदल, अध्यापक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देना समय की जरूरत: तरनजीत सिंह संधू

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि वह महान पंथक शख्सियत सरदार तेजा सिंह समुंदरी और अपने दादा के जीवन उद्देश्यों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी और विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए।

उन्होंने कहा कि पंजाब के युवा प्रतिभाशाली और मेहनती हैं। जरूरत केवल उनकी ऊर्जा और क्षमता को सही दिशा देने की है। आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि युवा नशे और अन्य बुरी आदतों से दूर रहकर खेलों तथा शारीरिक कसरत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं।

सरदार संधू ने कहा कि शारीरिक रूप से स्वस्थ युवा मानसिक रूप से भी मजबूत होते हैं। इसलिए गांवों में जिम, खेल मैदान और अन्य खेल सुविधाओं का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने गांव के लोगों और युवाओं से अपील की कि वे इन सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और पंजाब को स्वस्थ, मेहनती तथा नशामुक्त बनाने में अपना योगदान दें।

‘जिम दा लंगर’ के तहत माझा में 50 जिम स्थापित करने का लक्ष्य: डॉ. अवतार सिंह

उड़ान ट्रस्ट के चेयरमैन और अमनदीप अस्पताल के डायरेक्टर एवं ऑर्थोपेडिक विभाग के चेयरमैन डॉ. अवतार सिंह ने कहा कि ‘जिम दा लंगर’ अभियान शुरू करने का मुख्य उद्देश्य पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे की बुरी आदतों से बचाकर कसरत, खेलों और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि सरहाली कलां का गुरु गोबिंद सिंह खालसा स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में गौरवशाली इतिहास रखता है। ऐसे ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान में जिम स्थापित करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी स्वस्थ और मजबूत बनाना है।

डॉ. अवतार सिंह ने बताया कि इस मुहिम के तहत इससे पहले बोहड़ू, खैरदीनके और अमृतसर के केंद्रीय यतीमखाना, पुतलीघर सहित विभिन्न स्थानों पर जिम स्थापित किए जा चुके हैं। इन जिमों का युवा नियमित रूप से लाभ उठा रहे हैं और अपने साथियों को भी नशों से दूर रहकर खेलों तथा कसरत से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अभियान के तहत माझा क्षेत्र के विभिन्न गांवों और कस्बों में एक वर्ष के दौरान 50 से अधिक जिम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

डॉ. अवतार सिंह ने कहा कि पंजाब को स्वस्थ और नशामुक्त बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा। माता-पिता, अध्यापक, पंचायतें, खेल क्लब, सामाजिक संस्थाएं और धार्मिक संगठन मिलकर युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि जिम केवल शरीर को मजबूत बनाने का स्थान नहीं है, बल्कि इससे युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और मेहनत करने की भावना भी विकसित होती है। यदि युवा नशों की बजाय खेलों और कसरत को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तो इसका लाभ उनके परिवारों और पूरे समाज को मिलेगा।

गुरु साहिबान की लंगर परंपरा से प्रेरित है ‘जिम दा लंगर’ अभियान

डॉ. अवतार सिंह ने कहा कि ‘जिम दा लंगर’ अभियान के माध्यम से गुरु साहिबान द्वारा शुरू की गई लंगर सेवा की परंपरा को एक नए रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। जिस तरह लंगर के माध्यम से जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करवाया जाता है, उसी तरह इस मुहिम के जरिए युवाओं को अच्छी सेहत, तंदुरुस्ती और कसरत की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल जिम स्थापित करना नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को स्वस्थ, अनुशासित और नशों से दूर रखकर पंजाब का भविष्य बेहतर बनाना है। उन्होंने सभी पंजाबियों से इस मुहिम का हिस्सा बनने और बच्चों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने की अपील की।

1917 में सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने रखी थी ऐतिहासिक स्कूल की नींव

सरहाली कलां का गुरु गोबिंद सिंह खालसा स्कूल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि पंजाब के शिक्षा और सामाजिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस संस्थान की स्थापना वर्ष 1917 में महान स्वतंत्रता सेनानी और सिख पंथ की प्रमुख शख्सियत सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने गुरु गोबिंद सिंह खालसा हाई स्कूल के रूप में की थी।

स्कूल के प्रिंसिपल अजय सिंह हुंदल ने संस्थान के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि उस समय आसपास के क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करने के लिए कोई स्कूल उपलब्ध नहीं था। सरदार तेजा सिंह समुंदरी शिक्षा के महत्व को अच्छी तरह समझते थे। उनका मानना था कि किसी भी समाज की तरक्की के लिए बच्चों का शिक्षित होना बेहद जरूरी है।

सरहाली गांव को स्कूल के लिए चुनने के पीछे भी उनकी दूरदर्शी सोच थी। यह गांव संधू गोत्र के 22 गांवों का केंद्रीय स्थान माना जाता था। सरदार तेजा सिंह समुंदरी स्वयं संधू गोत्र से संबंधित थे और उनका पैतृक गांव बुर्ज राय होने के बावजूद वह सरहाली को अपना गांव बताते थे।

स्कूल की स्थापना के लिए उन्होंने इलाके के लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया और उनके सहयोग से जमीन का बड़ा हिस्सा स्कूल के नाम करवाया। स्कूल में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लाहौर कॉलेज में बीएससी और बीटी की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे सरदार मोहन सिंह, सरदार शेर सिंह और सरदार सुजान सिंह को अध्यापक नियुक्त किया गया।

शिक्षा के साथ धार्मिक और नैतिक मूल्यों पर भी दिया जाता था जोर

सरदार तेजा सिंह समुंदरी की सोच विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं थी। वह चाहते थे कि बच्चे शिक्षा के साथ धर्म, नैतिकता और अच्छे संस्कार भी ग्रहण करें। इसी सोच के तहत स्कूल की स्थापना के समय ही परिसर में गुरुद्वारा साहिब की इमारत भी बनाई गई।

उस समय यातायात के साधन सीमित होने के कारण दूर-दराज के गांवों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए स्कूल में छात्रावास की व्यवस्था की गई। अध्यापकों के रहने के लिए भी आवास बनाए गए।

स्कूल में प्रतिदिन सुबह विद्यार्थियों और अध्यापकों की ओर से गुरुद्वारा साहिब में नितनेम किया जाता था। इसके बाद कड़ाह प्रसाद की देग बांटी जाती और फिर पढ़ाई शुरू होती थी। शाम को रहिरास साहिब और कीर्तन सोहिला का पाठ किया जाता था। आज भी स्कूल परिसर में मौजूद गुरुद्वारा साहिब की शानदार इमारत इसकी पुरानी परंपराओं और इतिहास की गवाही देती है।

एक स्कूल से कई शिक्षण संस्थानों तक पहुंचा सफर

समय के साथ सरदार तेजा सिंह समुंदरी द्वारा शुरू किया गया खालसा हाई स्कूल आज कई शिक्षण संस्थानों के समूह के रूप में विकसित हो चुका है। पुराने गुरु गोबिंद सिंह खालसा हाई स्कूल को अब सीनियर सेकेंडरी स्कूल का दर्जा मिल चुका है।

इसके साथ खालसा पब्लिक स्कूल (अंग्रेजी माध्यम), खालसा कॉलेज फॉर वुमेन, खालसा आईटीआई फॉर गर्ल्स और खालसा

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