दोरांगला सरकारी अस्पताल की जर्जर इमारत बनी मरीजों और स्टाफ के लिए मुसीबत

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लाइव भारत अमृतसर 24-अगस्त (मनी शर्मा)

दोरांगला के सरकारी अस्पताल की करीब 70-80 साल पुरानी और जर्जर इमारत अब मरीजों और अस्पताल में ड्यूटी निभा रहे स्टाफ के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है। बारिश के दिनों में अस्पताल की छतों से पानी टपकने, मरीजों के बेड गीले होने और वार्डों में पानी भर जाने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। पानी जमा होने के कारण अस्पताल परिसर में सांपों और अन्य जहरीले कीड़े-मकौड़ों के निकलने का खतरा भी बना रहता है।

अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची मरीज *रणजीत कौर* ने बताया कि अस्पताल की इमारत की हालत बेहद खराब है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण मरीजों के बेड तक गीले हो जाते हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि दोरांगला का यह अस्पताल आसपास के करीब *20-25 गांवों* के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाता है, लेकिन यहां मरीजों के रात के समय ठहरने या भर्ती रहने के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी है।

रणजीत कौर ने पंजाब सरकार से मांग की कि अस्पताल में नए कमरे और वार्ड बनाए जाएं। इसके साथ ही जरूरी दवाइयां और अन्य बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज मिल सके।

  • बारिश के दौरान वार्ड में भर जाता है पानी

वहीं अस्पताल की स्टाफ नर्स *हरजीत कौर* ने बताया कि बारिश के दिनों में वार्ड के अंदर पानी भर जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों और स्टाफ के लिए बैठने तक की जगह नहीं बचती। उन्होंने कहा कि पानी जमा होने के कारण सांपों और अन्य जहरीले कीड़े-मकौड़ों के निकलने का डर भी बना रहता है।

स्टाफ नर्स के अनुसार, अस्पताल की इमारत की मरम्मत को लेकर पहले भी लिखित रूप से मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

  • नई इमारत और मरम्मत को लेकर अधिकारियों को भेजा गया प्रस्ताव

दूसरी ओर, *पीएचसी दोरांगला में तैनात डॉक्टर अमनदीप कौर* ने बताया कि पुरानी इमारत को पिछले बाढ़ के दौरान काफी नुकसान पहुंचा था। अस्पताल की नई इमारत और मरम्मत से संबंधित कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करवाया जा चुका है।

डॉ. अमनदीप कौर ने बताया कि *एसडीएम दीनानगर और पीडब्ल्यूडी के जेई* के माध्यम से आवश्यक एस्टीमेट तैयार करवाकर चंडीगढ़ स्थित संबंधित कार्यालय को भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा जर्जर क्लेरिकल बिल्डिंग को गिराने के संबंध में भी पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से मौके का निरीक्षण किया जा चुका है।

  • बारिश के पानी की निकासी भी बड़ी समस्या

डॉ. अमनदीप कौर ने बताया कि अस्पताल के आसपास का क्षेत्र ऊंचा होने के कारण बारिश का पानी अस्पताल परिसर में जमा हो जाता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए पानी की निकासी को लेकर गांव के सरपंच से भी बातचीत की गई है, ताकि बरसात का पानी अस्पताल के अंदर जमा न हो।

उन्होंने कहा कि इमारत से जुड़ी समस्याओं के बावजूद अस्पताल का स्टाफ अपनी ड्यूटी पूरी जिम्मेदारी से निभा रहा है और मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज तथा उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

  • स्थानीय लोगों ने सरकार से की जल्द कार्रवाई की मांग

इलाका निवासियों और अस्पताल के स्टाफ ने पंजाब सरकार, स्वास्थ्य विभाग तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि दोरांगला सरकारी अस्पताल की जर्जर इमारत की समस्या को गंभीरता से लिया जाए और *नई इमारत के निर्माण का काम जल्द शुरू करवाया जाए।*

इसके साथ ही अस्पताल में बारिश के पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था करने तथा मरीजों और अस्पताल के स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब *20-25 गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र* होने के कारण दोरांगला सरकारी अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना समय की मुख्य जरूरत है।