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गेहूँ की आमद 100 लाख मीट्रिक टन के पार; 99. 5 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की हुई खरीद

पिछले साल की अपेक्षा 30 प्रतिशत अधिक की हुई खरीद
पंजाब ने फिर देश के अन्न भंडार में दिया डाला अहम योगदान; देश व्यापक खरीद में पंजाब का 50 प्रतिशत हिस्सा
मंडी में किसी भी किसान को इंतज़ार नहीं करना पड़ा- कटारूचक्क
चंडीगढ़, 27 अप्रैल:
राज्य भर की मंडियों में आज गेहूँ की आमद 100 लाख मीट्रिक टन को पार कर गई है जिस में से 99. 5 लाख टन सरकारी एजेंसियाँ और प्राईवेट व्यापारियों की तरफ से पहले ही खऱीदी जा चुकी है। व्यापारियों की तरफ से करीब 3. 5 लाख टन जबकि बाकी गेहूँ सरकार की तरफ से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खऱीदी गई है। आज दिन के अंत तक सिफऱ् 1 लाख टन गेहूँ  बिना खऱीद के बची थी क्योंकि इसकी सफ़ाई होनी बाकी थी।MSP पर अब तक 429 लाख मीट्रिक टन गेहूं की हुई खरीद, 48.2 लाख किसानों को मिले  85 हजार करोड़ रुपए | more than 48 lakh farmers receive 85000 crore as  governmnet
यह जानकारी देते हुए खाद्य, सिविल स्पलाई एवं उपभोक्ता  मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने बताया कि मौजूद साीजन में 100 लाख टन गेहूँ की खरीद के आंकड़े को पार करके पिछले वर्ष हुई कुल 96 लाख टन गेहूँ की खरीद को मात देते हुए  खरीद प्रक्रिया आज अपने आखिरी पड़ाव में दाखि़ल हो गई है।
पिछले साल दौरान गेहूँ की आमद की तुलना करते हुए मंत्री ने कहा कि यह सम्मान की बात है कि देश भर में गेहूँ की सरकारी खरीद का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य में से हुआ है जिसके साथ एक बार फिर पंजाब देश के अन्नदाताओं  में से अग्रणी रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इस साल न्यूनतब समर्थन मूल्य पर कुल सरकारी खरीद पिछले साल के मुकाबले न्यूनतब 30 प्रतिशत अधिक होने की उम्मीद है जो कि राज्यों में बढ़ी खुशहाली का संकेत है।
खरीद प्रक्रिया की रफ़्तार पर तसल्ली प्रकट करते हुए मंत्री ने कहा कि पूरे सीज़न दौरान दिन के अंत में बिना खऱीद के बची गेहूँ की मात्रा कभी भी उस दिन की आमद के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं थी, जो इस तथ्य की तरफ सपष्ट तौर पर इशारा करता है कि ज़्यादातर किसानों की गेहूँ उसी दिन ही खऱीदी गई है जिस दिन वह अपनी गेहूँ मंडी में ले कर आए थे।
गेहूँ की लिफटिंग संबंधी मंत्री ने कहा कि इस साल मंडियों में 100 लाख टन गेहूँ की आमद सिफऱ् 15 दिनों में ही हो गई है जबकि पिछले साल इसी तारीख़ तक 22 दिनों में 94 लाख टन गेहूँ की आमद हुई थी। इस लिए राज्य में सीमित लेबर और ट्रांसपोर्ट स्रोतों पर ध्यान देना लाजि़मी था।  उन्होंने आगे कहा कि गेंहू की लिफटिंग  खरीद एजेंसियाँ का अंदरूनी मामला है और इसका किसी भी दिन किसी भी तरह के साथ गेहूँ की तुरंत खरीद और अदायगी सम्बन्धित किसानों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय ज़्यादातर जिलों में लिफटिंग की रफ़्तार गेहूँ की आमद की रफ़्तार की अपेक्षा अधिक है, इस लिए चिंता करने की कोई बात नहीं है।

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