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अमृतसर में दर्दनाक हादसा: श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन के लिए आए 13 वर्षीय अमृतधारी सिख बालक की पेड़ गिरने से मौत

रिपोर्ट: लाइव भारत / अमृतसर 23-जून (मनी शर्मा)

सिरसा से आए श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ हुआ हादसा, रेलवे स्टेशन के बाहर घटी घटना

SGPC अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिवार के साथ जताया दुख

कम उम्र में अमृत छककर गुरसिख जीवन जी रहा था राजप्रीत सिंह

अमृतसर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन करने के लिए हरियाणा के सिरसा से अमृतसर पहुंचे श्रद्धालुओं के एक जत्थे के साथ मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार के बाहर खड़े एक पुराने और विशाल पेड़ के अचानक गिर जाने से 13 वर्षीय अमृतधारी सिख बालक *राजप्रीत सिंह* की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना से श्रद्धालुओं के जत्थे और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हरियाणा के सिरसा से 15 श्रद्धालुओं का जत्था देर रात करीब 2 बजे श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए अमृतसर पहुंचा था। जत्था रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट के बाहर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) द्वारा संचालित मुफ्त बस सेवा का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान स्टेशन के बाहर खड़ा कई दशक पुराना विशाल पेड़ अचानक भरभराकर गिर पड़ा।

पेड़ की चपेट में आने से 13 वर्षीय राजप्रीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा इतना भयावह था कि बालक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

रेलवे थाना अमृतसर के एएसआई *बगीचा सिंह* ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

घटना की सूचना मिलते ही श्री दरबार साहिब के मैनेजर *बिक्रमजीत सिंह* सहित SGPC के कई अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।

मृतक के पिता ने बताया कि उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उन्होंने कहा कि उनका पुत्र राजप्रीत सिंह बचपन से ही सिख धर्म और गुरमत विचारधारा से गहराई से जुड़ा हुआ था। राजप्रीत ने कम उम्र में ही अमृत छक लिया था और एक समर्पित गुरसिख के रूप में जीवन व्यतीत कर रहा था। वह नियमित रूप से गुरबाणी का पाठ करता था, गुरुद्वारा साहिब जाता था और सिख मर्यादा का पालन करता था।

इस दर्दनाक घटना ने श्रद्धालुओं और स्थानीय संगत को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार ने प्रशासन से सहायता और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

 

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